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Saturday, 11 April 2020

सरस्वती वंदना


हे वीणावादिनी तुझको नमन संसार करता है।
लगाता ध्यान जो तुझ में वही जीवन सँवरता है।
हे वीणावादिनी तुझको नमन संसार करता है...

विराजें हंस पर देवी धवल से वस्त्र हैं तन पर।
बजा कर वह मधुर वीणा करें सुमधुर असर मन पर।
जिसे वरदान देती हैं वही दिन दिन निखरता है।1
हे वीणावादिनी तुझको नमन संसार करता है...

मैं हूं मतिमंद हे माते मुझे दो बुद्धि की थाती।
भरूं घृत ज्ञान दीपक में जलाऊं भक्ति की बाती।
तुम्हारा नाम ही उर में भगति का भाव भरता है।2
हे वीणावादिनी तुझको नमन संसार करता है...

करूं माता यही विनती उड़ेलो ज्ञान का सागर।
मिले विद्द्या जरा भर जाय हमारी बुद्धि की गागर।
जो पाता है दरश तेरे वही भव से उतरता है।3
हे वीणावादिनी तुझको नमन संसार करता है...

भरी ममता तेरे उर में दया की दृष्टि रखती हो।
करें जो भक्ति से पूजा हिया उनके ही बसती हो।
चरण पूजे जो नित तेरे सुखी हो नित विचरता है।4
हे वीणावादिनी तुझको नमन संसार करता है...

प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, 11 अप्रैल 2020

15 comments:

  1. बहुत सुंदर रचना sir

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  2. जय माँ वीणा वादिनी। ब्लॉलिंग की दुनिया में स्वागत है आपका प्रवीण जी।

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  3. आपका अन्तःस्थल से आभार सुनीता जी

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  4. सुंदर अभिव्यक्ति प्रवीण जी

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    1. बहुत बहुत आभार आपका नमिता जी। आज शुरुआत की है

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  5. अतिसुन्दर

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  6. बहुत खूबसूरत

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  7. बहुत ही सुन्दर ।

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  8. Wonderful ode to the Goddess of Learning!

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