*शीर्षक : अविजित सेनानी*
*विधा : गीतिका छंद पर आधारित गीतिका*
देश का सैनिक हमेशा युद्ध को तैयार है।
चुप नहीं वह बैठता सुन कर कभी ललकार है।1
जब खड़ा हो सरहदों पर वह न झपकाये पलक।
नित अचल अविचल सजग निष्फल करे रिपु वार है।2
नित नयी दुष्वरियाँ जिनकी न कोई कल्पना।
हर परिस्थिति में सदा अरि का करे संहार है।3
देश की रक्षा करे सैनिक सभी सुख त्याग कर।
नववधू के नूपुरों की भूलता झनकार है।4
देश के हर नागरिक की वह समझता वेदना।
प्राकृतिक विपदाओं' में बनता वो' तारणहार है।5
*आपदा में दे सहारा बन के तारणहार है।??*
वह नहीं कुछ माँगता सेवा करे निःस्वार्थ बन।
बस मिले सम्मान जो सबसे बड़ा उपहार है।6
मूल्य कोई आँक सकता क्या कभी बलिदान का?
वह तिरंगे पर निछावर कर रहा संसार है।7
छोड़ पीछे सर्व रिश्ते प्रीति भारत से करे।
राष्ट्र वादी व्यक्त करता कोटिशः आभार है।8
मूल्य पहचानें शहीदों के बहाये रक्त का।
व्यर्थ मत बलिदान हो यह वक्त की दरकार है।9
*प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, 22 मई 2020*
*विधा : गीतिका छंद पर आधारित गीतिका*
देश का सैनिक हमेशा युद्ध को तैयार है।
चुप नहीं वह बैठता सुन कर कभी ललकार है।1
जब खड़ा हो सरहदों पर वह न झपकाये पलक।
नित अचल अविचल सजग निष्फल करे रिपु वार है।2
नित नयी दुष्वरियाँ जिनकी न कोई कल्पना।
हर परिस्थिति में सदा अरि का करे संहार है।3
देश की रक्षा करे सैनिक सभी सुख त्याग कर।
नववधू के नूपुरों की भूलता झनकार है।4
देश के हर नागरिक की वह समझता वेदना।
प्राकृतिक विपदाओं' में बनता वो' तारणहार है।5
*आपदा में दे सहारा बन के तारणहार है।??*
वह नहीं कुछ माँगता सेवा करे निःस्वार्थ बन।
बस मिले सम्मान जो सबसे बड़ा उपहार है।6
मूल्य कोई आँक सकता क्या कभी बलिदान का?
वह तिरंगे पर निछावर कर रहा संसार है।7
छोड़ पीछे सर्व रिश्ते प्रीति भारत से करे।
राष्ट्र वादी व्यक्त करता कोटिशः आभार है।8
मूल्य पहचानें शहीदों के बहाये रक्त का।
व्यर्थ मत बलिदान हो यह वक्त की दरकार है।9
*प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, 22 मई 2020*
No comments:
Post a Comment